Feb 26, 2026

वर्षाजल और ठोस कचरे का होगा वैज्ञानिक समाधान, उत्तराखंड के सभी 11 नगर निगमों में तैनात होंगे विशेषज्ञ अभियंता

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने शहरी पर्यावरण प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा निर्णय लिया है। प्रदेश कैबिनेट की बैठक में राज्य के 11 नगर निगमों में पहली बार पर्यावरण इंजीनियर तैनात करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई है। इन पदों के सृजन के साथ ही शहरी निकायों में केंद्र और राज्य सरकार की पर्यावरण संबंधी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त होगा।

शहरी विकास विभाग के अनुसार, केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं—विशेष रूप से स्वच्छता, वायु गुणवत्ता सुधार और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन—को निर्धारित मानकों के अनुरूप धरातल पर लागू करने के लिए विशेषज्ञ अधिकारियों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इसी क्रम में प्रशासनिक सुधारों के तहत सभी 11 नगर निगमों में एक-एक पर्यावरण अभियंता का पद सृजित किया गया है। प्रत्येक नगर निगम में एक पर्यावरण इंजीनियर संविदा के आधार पर नियुक्त किया जाएगा। इनका मासिक मानदेय 80 हजार से 1.30 लाख रुपये तक निर्धारित किया गया है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, ये अभियंता पर्यावरण इंजीनियर के साथ-साथ हाइड्रोलॉजिस्ट की भूमिका भी निभाएंगे। इससे शहरी क्षेत्रों में जल निकासी, वर्षाजल प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण जैसे विषयों पर तकनीकी दृष्टिकोण से बेहतर कार्य हो सकेगा। वर्तमान में स्वच्छ वायु कार्यक्रम केवल देहरादून, ऋषिकेश और काशीपुर नगर निगमों में संचालित हो रहा है। शेष आठ नगर निगमों में भी जल्द ही यह कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी है। पर्यावरण इंजीनियरों की तैनाती से इन योजनाओं के विस्तार और निगरानी में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। राज्य के नगर निगमों के सामने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। कूड़ा निस्तारण, स्रोत पर पृथक्करण और वैज्ञानिक तरीके से कचरे के प्रसंस्करण को लेकर कई निकाय लक्ष्य से पीछे हैं। सरकार का मानना है कि विशेषज्ञ अभियंताओं की नियुक्ति से इस क्षेत्र में स्थायी और पर्यावरणीय दृष्टि से सुरक्षित समाधान विकसित किए जा सकेंगे। सरकार के इस फैसले को शहरी विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो आने वाले समय में स्वच्छ, हरित और टिकाऊ शहरों की दिशा में ठोस आधार तैयार करेगा।