Feb 26, 2026

रेडॉन गैस है भूकंप की प्रारंभिक चेतावनी: वाडिया संस्थान के वैज्ञानिकों ने हिमालयी क्षेत्र में रचा नया इतिहास

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देहरादून। भूकंप की सटीक भविष्यवाणी अब केवल कल्पना नहीं रह जाएगी। उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में किए गए एक महत्वपूर्ण अध्ययन में यह सामने आया है कि चट्टानों और मिट्टी से निकलने वाली ‘रेडॉन-222’ गैस भूकंप आने से कुछ दिन पहले ही खतरे का संकेत देने लगती है। यह शोध वाडिया हिमालय भूवैज्ञानिक संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है, जिसे भूकंप पूर्वानुमान की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। संस्थान द्वारा टिहरी जिले के गुत्तू स्थित प्रयोगशाला में लगभग दो दशकों से भूकंपीय गतिविधियों पर अध्ययन किया जा रहा है। सिस्मोलॉजी विभाग के प्रभारी वैज्ञानिक नरेश कुमार ने बताया कि चट्टानों और मिट्टी से स्वाभाविक रूप से निकलने वाली रेडॉन गैस की मात्रा में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से दस वर्षों के रेडॉन गैस डेटा का विश्लेषण कर एक मॉडल तैयार किया गया। विश्लेषण में पाया गया कि जब रेडॉन गैस का उत्सर्जन सामान्य से अधिक हुआ, तो उसके पांच से सात दिनों के भीतर तीन से चार तीव्रता के भूकंप दर्ज किए गए।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि संवेदनशील क्षेत्रों में रेडॉन गैस के स्तर की निरंतर निगरानी की जाए, तो भूकंप का पूर्वानुमान लगाने में महत्वपूर्ण सहायता मिल सकती है। इस शोध में वैज्ञानिक वंदना, प्रियदर्शी चिन्मय कुमार और संजय कुमार वर्मा भी शामिल रहे। अध्ययन से संबंधित शोधपत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नल में जर्नल ऑफ रेडियोएनालिटिकल एंड न्यूक्लियर केमिस्ट्री प्रकाशित हुआ है। गौरतलब है कि पिछले महीने देशभर में 64 भूकंप दर्ज किए गए, जिनमें से दो उत्तराखंड में आए। वर्ष 1975 से 2024 तक राज्य में कुल 447 भूकंप दर्ज हो चुके हैं, जिनमें अधिकांश की तीव्रता तीन से चार के बीच रही है। उत्तराखंड को भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। हाल ही में भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा जारी नई भूकंपीय क्षेत्रीकरण मानचित्र में राज्य को उच्च जोखिम वाले जोन-6 में रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रेडॉन गैस आधारित यह तकनीक और विकसित होती है, तो भविष्य में भूकंप से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह शोध न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है।