जोशीमठ। विश्व प्रसिद्ध स्कीइंग रिजॉर्ट औली के अंतरराष्ट्रीय स्लोप्स की तारीफ पूरी दुनिया में होती है, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि यहाँ के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपना दमखम दिखाने में लगातार पिछड़ रहे हैं। औली में आयोजित राष्ट्रीय स्कीइंग खेलों के बाद अब जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में चल रही 'खेलो इंडिया' राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी उत्तराखंड का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। दोनों ही मंचों पर राज्य की झोली लगभग खाली नजर आ रही है।
आंकड़ों पर गौर करें तो हाल ही में औली में संपन्न राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखंड को मात्र तीन पदक (एक स्वर्ण, दो कांस्य) मिले और ये तीनों पदक माउंटेनियरिंग इवेंट में आए। यही कहानी गुलमर्ग में भी दोहराई जा रही है। रविवार से शुरू हुई इस प्रतियोगिता में अब तक उत्तराखंड के खाते में केवल दो पदक (एक स्वर्ण, एक कांस्य) आए हैं, और यहाँ भी दोनों पदक माउंटेनियरिंग के ही हैं। उत्तराखंड के लिए एकमात्र राहत की खबर शार्दुल थपलियाल का प्रदर्शन रहा है, जिन्होंने औली के बाद गुलमर्ग में भी स्वर्ण पदक जीतकर राज्य की साख बचाई है। खिलाड़ियों के पिछड़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण प्रदेश में किसी समर्पित सरकारी प्रशिक्षण संस्थान का न होना है। गढ़वाल मंडल विकास निगम के पूर्व स्कीइंग प्रशिक्षक विजयंत रावत का कहना है कि हिमाचल प्रदेश में 'अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण संस्थान' और जम्मू-कश्मीर में 'IISM' जैसे संस्थान हैं, जो खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास की सुविधा देते हैं। इसके विपरीत, औली में GMVN जो प्रशिक्षण चलाता है, उसका शुल्क इतना अधिक है कि स्थानीय युवा इसमें रुचि नहीं ले पाते। परिणाम यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्लोप घर में होने के बावजूद यहाँ के युवा केवल दर्शक बनकर रह गए हैं। GMVN के स्कीइंग प्रशिक्षक प्रदीप मंद्रवाल ने एक और चिंताजनक पहलू उजागर किया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष औली में निगम का प्रशिक्षण सत्र चला, लेकिन एक भी स्थानीय खिलाड़ी इसमें शामिल नहीं हुआ। नियमित अभ्यास और मार्गदर्शन के अभाव में उत्तराखंड के खिलाड़ी लगभग हर इवेंट में प्रतिभाग तो कर रहे हैं, लेकिन जीत की दहलीज तक नहीं पहुँच पा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक औली में हिमाचल और कश्मीर की तर्ज पर एक किफायती और आधुनिक प्रशिक्षण संस्थान नहीं खोला जाता, तब तक उत्तराखंड का प्रदर्शन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर फीका ही रहेगा।