उत्तराखंड के समाज कल्याण विभाग में दोहरी पेंशन के नाम पर सरकारी खजाने में बड़ी सेंधमारी का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। विभाग की जांच रिपोर्ट के अनुसार, सैकड़ों अपात्र लोगों ने नियमों को ताक पर रखकर करीब 16 करोड़ रुपये की धनराशि डकार ली है। समाज कल्याण निदेशालय के निदेशक डॉ. संदीप तिवारी ने इस पूरे मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है, जिसमें दोषियों से पाई-पाई वसूलने की सिफारिश की गई है।
उत्तराखंड में समाज कल्याण विभाग की पेंशन व्यवस्था में बड़ा घोटाला सामने आया है। विभागीय जांच में खुलासा हुआ है कि दोहरी पेंशन लेने वाले लाभार्थियों ने सरकारी खजाने को करीब 16 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह खेल एक-दो साल नहीं, बल्कि लगभग 12 वर्षों तक चलता रहा और विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। मामले का खुलासा कैग की विश्लेषण रिपोर्ट के बाद हुआ, जिसमें बताया गया था कि 1377 लोग एक साथ दो-दो पेंशन योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। इसके बाद समाज कल्याण विभाग ने व्यापक स्तर पर जांच शुरू की। जांच में पाया गया कि सूची में शामिल 93 लोगों की मृत्यु हो चुकी थी, जबकि 314 लोगों के नाम सत्यापन के दौरान हटा दिए गए। इसके बाद भी 970 लोग ऐसे पाए गए जो लगातार दोहरी पेंशन का लाभ ले रहे थे। शासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी समाज कल्याण निदेशालय के निदेशक Dr Sandeep Tiwari को सौंपी थी। सूत्रों के अनुसार निदेशक द्वारा जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि दोहरी पेंशन के जरिए सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ और इससे करीब 16 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ। रिपोर्ट में यह भी संस्तुति की गई है कि जिन लोगों ने नियमों के विपरीत दोहरी पेंशन ली है, उनसे राशि की वसूली की जाए। साथ ही भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों को रोकने के लिए विभागीय स्तर पर नई व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव भी दिया गया है।समाज कल्याण विभाग अब पेंशन प्रक्रिया को और सख्त बनाने जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत यदि कोई व्यक्ति समाज कल्याण विभाग से पेंशन के लिए आवेदन करेगा, तो उसकी पूरी जानकारी कोषागार विभाग को भेजी जाएगी। कोषागार विभाग यह सत्यापित करेगा कि संबंधित व्यक्ति पहले से किसी अन्य योजना के तहत पेंशन तो प्राप्त नहीं कर रहा है। कोषागार विभाग से अनुमति मिलने के बाद ही पेंशन स्वीकृत की जाएगी। विभाग ने दोहरी पेंशन लेने वालों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया था। इसके तहत 349 लोगों ने शपथ पत्र जमा कर अपनी सफाई पेश की है। अब शासन स्तर पर रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है और माना जा रहा है कि जल्द ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और वसूली प्रक्रिया शुरू हो सकती है। यह मामला सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है और विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की आवश्यकता को भी उजागर करता है।

