उत्तराखंड के चमोली में आसमानी आफत: 500 बकरियों की मौत के बाद आपदा प्रबंधन टीमें हाई अलर्ट पर

Blog
 Image

उत्तराखंड के चमोली जनपद में मौसम का कहर भेड़पालकों पर भारी पड़ गया। निजमुला घाटी के भनाली तोक में आकाशीय बिजली गिरने से करीब 500 बकरियों की मौत हो गई। इस हादसे ने क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक पशुपालक परिवारों को गहरे आर्थिक संकट में धकेल दिया है।

जानकारी के अनुसार विकासखंड दशोली के गौणा-भनाली तोक में देर रात बारिश के बीच अचानक बिजली गिरने से यह बड़ा हादसा हुआ। उस समय बकरियां चरान के लिए खुले क्षेत्र में थीं, जिससे वे सीधे बिजली की चपेट में आ गईं। मृत बकरियां करीब 14 भेड़पालकों की बताई जा रही हैं, जिनमें राकेश सिंह, हुकम सिंह और मदन लाल समेत कई स्थानीय पशुपालक शामिल हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि देर रात सूचना मिली कि आकाशीय बिजली गिरने से बड़ी संख्या में बकरियों की मौत हुई है। प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन कर रही है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इस हादसे में पशुपालकों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। पीड़ित भेड़पालकों का कहना है कि एक ही पल में उनकी सालों की मेहनत खत्म हो गई। कई परिवार पूरी तरह से पशुपालन पर निर्भर हैं, ऐसे में यह नुकसान उनके लिए आजीविका का संकट बन गया है। उन्होंने प्रशासन से जल्द मुआवजा देने और राहत पहुंचाने की मांग की है। दरअसल, निजमुला घाटी क्षेत्र भेड़ पालन के लिए जाना जाता है और यहां के ग्रामीणों की मुख्य आय का स्रोत यही है। ऐसे में इस तरह की प्राकृतिक आपदा का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। मौसम विभाग भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने पहले ही 3 से 5 मई तक जिले में ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। चेतावनी में भारी बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं की संभावना जताई गई थी। रविवार रात से ही जिले में मौसम खराब बना हुआ था और इसी दौरान यह हादसा हो गया। राज्य के अन्य जिलों जैसे देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत और उधम सिंह नगर में भी खराब मौसम को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में तेज बारिश, ओलावृष्टि और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। फिलहाल प्रशासन अलर्ट मोड पर है और आपदा प्रबंधन टीमें सक्रिय कर दी गई हैं। हालांकि, इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम की मार और उससे जुड़े जोखिमों को उजागर कर दिया है।