उत्तराखंड में एसआईआर खत्म, डाटा फ्रीज हुआ, तीन अक्तूबर को जारी होगी अंतिम मतदाता सूची

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देहरादून। निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया की दिशा में उत्तराखंड ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। चुनाव आयोग द्वारा राज्यभर में चलाया जा रहा विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान सोमवार मध्य रात्रि 12 बजे सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। अभियान के समाप्त होते ही निर्वाचन आयोग ने पूरे चुनावी डाटा को फ्रीज कर दिया है, जिससे अब इसमें कोई अनधिकृत फेरबदल संभव नहीं होगा। आयोग आगामी 3 अक्तूबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन करने जा रहा है, जिससे यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा कि राज्य में कितने नए मतदाता जुड़े हैं और कितने अपात्र वोट काटे गए हैं।

उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की लंबी प्रक्रिया सोमवार रात 12 बजे समाप्त हो गई। इसके साथ ही चुनाव आयोग ने पुनरीक्षण से संबंधित पूरा डाटा फ्रीज कर दिया है। अब इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया जा सकेगा। प्रदेश की बहुप्रतीक्षित अंतिम मतदाता सूची 3 अक्टूबर को जारी होगी। इसी सूची से स्पष्ट होगा कि पुनरीक्षण के बाद कितने मतदाताओं के नाम हटे, कितने नए नाम जुड़े और कितने मतदाताओं की स्थिति में बदलाव हुआ। चुनाव आयोग ने उत्तराखंड में SIR की शुरुआत 8 जून से की थी। इस दौरान बूथ लेवल अधिकारियों यानी BLO ने घर-घर पहुंचकर मतदाताओं को गणना प्रपत्र उपलब्ध कराए। इन प्रपत्रों को भरकर जमा करने की अंतिम तिथि 7 जुलाई थी। इसके बाद 14 जुलाई को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की गई। ड्राफ्ट सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर 14 जुलाई से 13 अगस्त तक दिया गया। इसके बाद दावों और आपत्तियों की सुनवाई तथा निस्तारण की प्रक्रिया चली, जो सोमवार को पूरी हो गई। उत्तराखंड की अंतिम मतदाता सूची पहले 15 सितंबर को जारी होनी थी, लेकिन पांच जिलों के मतदाताओं के उत्तर प्रदेश की पुरानी मतदाता सूची से सत्यापन की प्रक्रिया के चलते अंतिम प्रकाशन की तिथि आगे बढ़ाई गई। अब आयोग ने प्रक्रिया पूरी करने के बाद 3 अक्टूबर को अंतिम सूची जारी करने की तैयारी की है। भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक कार्यक्रम में भी उत्तराखंड के लिए SIR के चरणों और 15 सितंबर की मूल अंतिम सूची तिथि दर्ज थी। सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास के अनुसार अब पूरा डाटा फ्रीज हो चुका है। इसका अर्थ है कि SIR के इस चरण में मतदाता सूची के डाटा में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जा सकेगा। हालांकि जिन पात्र मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं हो पाएंगे, उनके लिए बाद में फॉर्म-6 के माध्यम से नाम दर्ज कराने का रास्ता खुला रहेगा। मतदाता सूची के शुद्धीकरण अभियान के दौरान प्री-SIR चरण में करीब पांच लाख ऐसे नाम हटाए गए, जिनके बारे में बताया गया कि संबंधित मतदाता स्थानांतरित हो चुके थे या उनकी मृत्यु हो चुकी थी। इसके बाद SIR की प्रक्रिया में BLO ने घर-घर जाकर गणना प्रपत्रों के माध्यम से मतदाताओं का सत्यापन किया। ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने के बाद करीब आठ लाख नाम सूची से हटाए गए। अब दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम सूची का प्रकाशन सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इसी के बाद राज्य में मतदाता सूची की संशोधित स्थिति का वास्तविक आंकड़ा सामने आएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के निर्देश पर सोमवार को आयोजित बैठक में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को SIR की पूरी प्रक्रिया और प्रगति की जानकारी दी गई। बैठक की अध्यक्षता अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने की। उन्होंने बताया कि दावे और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। बैठक में भाजपा से राजकुमार पुरोहित, कांग्रेस से राजेंद्र सिंह भंडारी और प्रशांत खंडूरी, बसपा से सत्यपाल और सतेंद्र चोपड़ा, आम आदमी पार्टी से अशोक सेमवाल तथा सीपीआई(एम) से अनंत आकाश मौजूद रहे। चुनाव कार्यालय के अनुसार कोई पात्र नागरिक यदि अंतिम सूची में अपना नाम नहीं पाता है तो वह फॉर्म-6 के माध्यम से नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकता है। यह आवेदन ऑनलाइन ECI-Net या BLO के माध्यम से किया जा सकता है। मतदाता अपनी स्थिति की जानकारी चुनाव आयोग के आधिकारिक मतदाता सेवा पोर्टल से भी देख सकते हैं। इस तरह उत्तराखंड में SIR का मुख्य चरण अब समाप्त हो चुका है। 3 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची सामने आने के बाद पुनरीक्षण के दौरान हुए बदलावों की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी। इसके बाद भी पात्र नागरिकों के लिए नाम दर्ज कराने की निर्धारित प्रक्रिया उपलब्ध रहेगी। अंतिम सूची का प्रकाशन अब इस पूरी कवायद का निर्णायक प्रशासनिक चरण होगा।