नई दिल्ली। बजट सत्र के 9वें दिन भी जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस समेत विपक्ष के सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया। कांग्रेस सांसद मांग कर रहे हैं कि लोकसभा में राहुल गांधी को बोलने दिया जाए। इसके बाद ही वे सदन की कार्यवाही को चलने देंगे। हालांकि स्पीकर ओम बिरला इसके पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि यह नियमों के खिलाफ है। ओम बिरला ने कहा कि सदन की कार्यवाही नियमों से चलती है और वैसे ही चलेगी। इस बीच सूत्रों के हवाले से खबर है कि विपक्ष लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। अगर ऐसा होता है, तो बजट सत्र के आने वाले दिन भी हंगामे भरे रह सकते हैं। सूत्रों के अनुसार विपक्ष बजट सत्र के दूसरे चरण में ये अविश्वास प्रस्ताव लेकर आ सकता है क्योंकि नियमों के तहत अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने के लिए 20 दिन का समय चाहिए होता है। स्पीकर के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाने की कई वजह बताई जा रही हैं, जिनमें लोकसभा स्पीकर द्वारा सदस्यों को बोलने की मंजूरी न देने, आसन द्वारा महिला सांसदों का नाम लेना, सत्ता पक्ष के कुछ सांसदों को सदन में हमेशा विशेषाधिकार देना और आठ विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित करना शामिल है।
लोकसभा स्पीकर के बयान पर हुआ विवाद, कांग्रेस की महिला सासंदों ने लिखा पत्र
इधर कांग्रेस की कुछ महिला सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा है। इस पत्र में कहा गया है कि महिला सांसदों के खिलाफ आधारहीन आरोप लगाए जा रहे हैं और विपक्ष के संसदीय अधिकारों को नकारा जा रहा है। सांसदों ने पत्र में लिखा कि उन्होंने सांविधानिक तरीके से प्रधानमंत्री का विरोध किया और इसलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। इससे पहले विगत पांच फरवरी को स्पीकर ओम बिरला ने कहा था कि जिस तरह का माहौल उस दिन लोकसभा में बना, उसमें कोई भी अप्रिय और अप्रत्याशित घटना घट सकती थी। उन्होंने साफ कहा कि ऐसा व्यवहार संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के बिल्कुल विपरीत था। लोकसभा में पीएम मोदी शाम 5 बजे बोलने वाले थे। लेकिन बैठक शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया, करीब 8 से 10 महिला सांसदए जिनमें कांग्रेस की तीन महिला सांसद शामिल थीं, पीएम की सीट के पास पहुंच गईं। वे बैनर लेकर खड़ी हो गईं। इससे सदन की कार्यवाही बाधित हुई। जिस पर स्पीकर ने सदन को स्थगित कर दिया। पीएम सदन में नहीं आए और भाषण रद्द हो गया। अगले दिन स्पीकर ने सदन में कहा कि अनहोनी हो सकती थी, इसलिए उन्होंने पीएम को सदन में आने से रोका। विपक्ष ने ऐसे आरोपों को खारिज करते हुए केवल इसे अपना विरोध बताया।