Apr 14, 2026

25 अप्रैल तक ऑनलाइन गणना, फिर प्रगणक सर्वेक्षण: उत्तराखंड में जनगणना की दोहरी प्रक्रिया से मिलेगी सटीक जानकारी

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देहरादून। उत्तराखंड में डिजिटल साक्षरता और नागरिक जागरूकता का एक नया उदाहरण देखने को मिल रहा है। देश की आगामी जनगणना के प्रथम चरण के रूप में शुरू की गई 'भवन स्व-गणना' प्रक्रिया को लेकर राज्यवासियों में भारी उत्साह है। पोर्टल खुलने के महज तीन दिनों के भीतर ही 18,000 से अधिक जागरूक नागरिकों ने अपने भवनों का विवरण ऑनलाइन दर्ज कर दिया है। 

जनगणना निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि सोमवार शाम सात बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य भर में कुल 18,031 लोगों ने आधिकारिक पोर्टल se.census.gov.in के माध्यम से अपनी स्व-गणना पूरी कर ली है। पंजीकरण सफल होने के साथ ही इन सभी नागरिकों को उनकी विशिष्ट 'एसई आईडी' जारी कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया अभी 25 अप्रैल तक निर्बाध रूप से जारी रहेगी। निदेशक ने जनता से अपील की है कि वे घर पर रहते हुए ही इस पोर्टल का उपयोग करें। पोर्टल पर लॉगिन करते समय मोबाइल या कंप्यूटर की गूगल लोकेशन स्वतः इसमें शामिल हो जाती है। यही सटीक लोकेशन आगामी 25 अप्रैल से शुरू होने वाले जमीनी सर्वे में मददगार साबित होगी। इसी डिजिटल डेटा के आधार पर प्रगणक बिना किसी भ्रम के सीधे आपके दरवाजे तक पहुँच सकेंगे। जनगणना के कार्यों की समीक्षा के लिए सोमवार को मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि जनगणना एक 'राष्ट्रीय महत्व' का कार्य है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों और मुख्य नगर आयुक्तों को निर्देश दिए कि जनगणना कार्य में तैनात किसी भी प्रगणक या पर्यवेक्षक की ड्यूटी किसी भी स्थिति में निरस्त न की जाए। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिलों में चल रहे कार्यों की निरंतर निगरानी और समीक्षा करें ताकि तय समय सीमा के भीतर लक्ष्य प्राप्त किया जा सके। उत्तराखंड में स्व-गणना के प्रति यह रुझान दर्शाता है कि लोग अब सरकारी प्रक्रियाओं में डिजिटल माध्यमों को अपना रहे हैं। यह न केवल समय की बचत कर रहा है, बल्कि डेटा की सटीकता को भी सुनिश्चित कर रहा है। यदि आपने अभी तक स्व-गणना नहीं की है, तो 25 अप्रैल से पहले पोर्टल पर जाकर इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें।