देहरादून। आईटी सेक्टर में कार्य कर रही सात फर्मों पर शुक्रवार को राज्य कर विभाग की केंद्रीयकृत आसूचना इकाई (सीआईयू) ने ताबड़तोड़ छापेमारी की. इस दौरान सीआईयू टीम ने बड़े पैमाने पर फर्जी आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) के टैक्स चोरी का पर्दाफाश किया। जांच में सामने आया कि ये फर्में बिना किसी वास्तविक माल सप्लाई के फर्जी बिलों के आधार पर जीएसटी चोरी कर रही थी। साथ ही प्रथम दृष्टया विभाग को करीब 4.75 करोड़ रुपए का राजस्व नुकसान होने की पुष्टि हुई है। वहीं इस कार्रवाई में 10 टीमों में 22 अधिकारी शामिल रहे, टीम ने 1.10 करोड़ रुपये मौके पर जमा कराए।
जानकारी के अनुसार सीआईयू की टीम ने आईटी सेक्टर में कार्य कर रही सात फर्मों पर छापेमारी के दौरान ई-वे बिल और जीएसटी पोर्टल पर उपलब्ध डाटा को चेक किया गया, जिसमें कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। जिन वाहनों पर ई-वे बिल जारी किए गए थे, वह बिल की तिथि पर किसी भी टोल प्लाजा से गुजरे ही नहीं, जिससे पूरे कारोबार पर संदेह गहरा गया। कई आपूर्तिकर्ता फर्मों का खरीद बैकअप भी उपलब्ध नहीं मिला, जो फर्जी सप्लाई चेन की ओर इशारा करता है। अधिकतर फर्में अपने पते पर भी नहीं मिली। जांच टीमों ने पाया कि जिन प्रतिष्ठानों पर व्यापार दिखाया गया था,उनमें से कई अपने घोषित पते पर मौजूद ही नहीं थी। इससे फर्जी बिलिंग का नेटवर्क और स्पष्ट हुआ। राज्य कर विभाग के उपायुक्त विनय पांडेय ने बताया है कि छापेमारी के दौरान कई दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। कार्रवाई के दौरान ही संबंधित फर्मों द्वारा 1.10 करोड़ रुपए जीएसटी के रूप में जमा करा दिए गए। विभाग के अनुसार आगे वित्तीय लेनदेन, बैंक स्टेटमेंट और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी गहन जांच जारी रहेगी। साथ ही इस अभियान के लिए विभाग ने 10 टीमों में 22 अधिकारियों को शामिल किया गया था।