जाख डाकघर वित्तीय संकट: लापरवाही की पुरानी शिकायतों पर कार्रवाई न करने का खामियाजा

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पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के खिर्सू ब्लॉक स्थित जाख गांव के डाकघर से एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है। सरकारी व्यवस्था और डाकघर के भरोसे पर अपनी जीवनभर की पूंजी सौंपने वाले ग्रामीणों के साथ बड़ी धोखाधड़ी हुई है। यहां तैनात हरियाणा मूल के ब्रांच पोस्टमास्टर और सहायक पोस्टमास्टर पर खाताधारकों के खातों से अवैध रूप से लाखों रुपये की फर्जी निकासी (वित्तीय अनियमितता) करने का गंभीर आरोप लगा है। इस घपले के उजागर होने के बाद जहां एक तरफ डाक विभाग ने दोनों आरोपी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है, वहीं आक्रोशित ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने कोतवाली श्रीनगर में लिखित शिकायत दर्ज कराकर पुलिसिया कार्रवाई की मांग की है। क्षेत्र पंचायत सदस्य सुरजीत सिंह बिष्ट ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि शुरुआती जांच में ही दो खाताधारकों के पैरों तले से जमीन खिसक गई। बिना किसी जानकारी के एक खाते से करीब 80 हजार रुपये और दूसरे खाते से लगभग एक लाख रुपये की अवैध निकासी की गई है। मुख्य डाकघर पौड़ी के डाक निरीक्षक और जांच अधिकारी अवधेश कुमार ने बताया जाख डाकघर के अंतर्गत जाख, दोंदड़ी, चिमनियूं, थापला, संगलदर और असिंगी गांवों के लगभग 350 खाताधारक आते हैं। जाख के ग्राम प्रधान को निर्देश दिया गया है कि वे सभी खाताधारकों की पासबुक विभाग को जमा कराएं। सभी 350 खातों के लेन-देन के रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा कि घोटाला कितना बड़ा है।

मामले की गंभीरता और जनप्रतिनिधियों के दबाव को देखते हुए डाक विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। डाक अधीक्षक विपिन भट्ट ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए कहा जाख डाकघर में फर्जी निकासी के मामले को देखते हुए दोनों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की तह तक जाने के लिए तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है। डाकघर का कामकाज ठप न हो, इसके लिए वहां फिलहाल एक नए कर्मचारी की तैनाती कर दी गई है। इस महाघोटाले के बीच जाख के ग्राम प्रधान मनीष रावत ने डाक कर्मियों की कार्यप्रणाली पर बेहद सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया, "केनरा बैंक द्वारा 6 जून को जारी किया गया मेरा एटीएम कार्ड आज तक मुझे डिलीवर नहीं हुआ, जबकि मेरा घर डाकघर से महज 50 मीटर की दूरी पर है। जब कड़ाई से पूछताछ की गई तो कर्मचारियों ने बताया कि कार्ड डाक कार्यालय में ही पड़ा है। प्रधान ने आरोप लगाया कि ये कर्मचारी ग्रामीणों की जरूरी रजिस्टर्ड डाक खुद ही रिसीव कर लेते थे और संबंधित व्यक्ति तक नहीं पहुंचाते थे। पूर्व में भी इनकी बदतमीजी और लापरवाही की शिकायतें उच्च अधिकारियों से की गई थीं, लेकिन तब प्रशासन ने आंखें मूंदे रखीं, जिसका नतीजा आज इस बड़ी धोखाधड़ी के रूप में सामने आया है। इस घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में अपनी गाढ़ी कमाई की सुरक्षा को लेकर भारी डर और चिंता का माहौल है। ग्रामीणों ने रोष जताते हुए मांग की है कि डाकघर में तैनात बाहरी प्रदेशों (विशेषकर हरियाणा) से आए कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया, उनके पुराने रिकॉर्ड और उनकी कार्यप्रणाली की भी उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। फिलहाल, डाक विभाग की त्रिसदस्यीय टीम और स्थानीय पुलिस दोनों मिलकर इस 'पोस्टमैन घोटाले' के पीछे के पूरे सिंडिकेट को बेनकाब करने में जुटी हैं।