सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाएं सुधारने की मांग तेज

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नई दिल्ली। लुटियंस दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी बंगलों के रखरखाव पर पिछले 12 वर्षों में हुए कथित खर्च को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) से मिली जानकारी का हवाला देते हुए दावा किया है कि वर्ष 2014 से 2026 के बीच केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी आवासों के रखरखाव पर कुल 547.68 करोड़ रुपये खर्च किए गए। सीजेपी ने सवाल उठाया है कि जब देश के कई ग्रामीण सरकारी स्कूल आज भी बिजली, पानी, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं, तो सरकारी धन की इतनी बड़ी राशि मंत्रियों के आवासों के रखरखाव पर क्यों खर्च की जा रही है। यह मुद्दा एक रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों के बाद चर्चा में आया है। सीजेपी ने इन आंकड़ों को आधार बनाकर केंद्र सरकार की खर्च प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। सीजेपी का कहना है कि सरकारी बंगलों के रखरखाव पर होने वाले खर्च का एक हिस्सा भी सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने में लगाया जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों बच्चों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है। कॉकरोच जनता पार्टी के मुताबिक, वर्ष 2014 से 2019 के बीच केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी बंगलों के रखरखाव पर करीब 133.9 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके बाद 2019 से 2024 के बीच यह राशि बढ़कर करीब 250 करोड़ रुपये बताई गई। वहीं, 2024 से 2026 के बीच करीब 174.5 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया गया है। सीजेपी के अनुसार, इन अवधियों को मिलाकर 12 वर्षों में कुल खर्च 547.68 करोड़ रुपये रहा। पार्टी ने खास तौर पर वर्ष 2025-26 के आंकड़े को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी आवासों के रखरखाव पर वर्ष 2014-15 में करीब 27 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जबकि 2025-26 में यह राशि बढ़कर करीब 92 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। सीजेपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस खर्च को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। पार्टी ने अपने अभियान के तहत कहा कि आलीशान सरकारी बंगलों के रखरखाव के बजाय सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए। पार्टी ने 92 करोड़ रुपये की राशि की तुलना आधुनिक सरकारी स्कूलों के निर्माण से भी की और दावा किया कि इतनी राशि से करीब 10 नए विश्वस्तरीय सरकारी स्कूल तैयार किए जा सकते हैं। पार्टी का तर्क है कि ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में बच्चों को बिजली, पीने का पानी, शौचालय, भोजन और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत है। ऐसे में सरकारी खर्च की प्राथमिकताओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सीजेपी ने यह मुद्दा अपने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के दौरान उठाया है। पार्टी का दावा है कि उसने 15 अगस्त से ग्रामीण सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर अभियान शुरू किया है। इसके तहत ग्रामीण स्कूलों का सामाजिक अंकेक्षण कराने और वहां बिजली, पेयजल, शौचालय तथा मध्याह्न भोजन जैसी सुविधाओं में सुधार की मांग की जा रही है। पार्टी ने ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ने वाले बच्चों की परिवहन संबंधी समस्याओं को भी अभियान में शामिल किया है। सीजेपी का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा के साथ सुरक्षित और पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं मिलना जरूरी है। सीजेपी का आरोप है कि सरकारी स्कूलों की बुनियादी जरूरतों के लिए धन की कमी का तर्क दिया जाता है, जबकि दूसरी ओर सरकार के पास दूसरे मदों में खर्च करने के लिए पर्याप्त धन मौजूद है। पार्टी ने कहा कि समस्या धन की कमी से ज्यादा प्राथमिकताओं और इच्छाशक्ति की है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने ग्रामीण सरकारी स्कूलों का दौरा करने का दावा करते हुए कहा कि कई जगहों पर बच्चों को जरूरी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकारी स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं और सरकार के अन्य फंड में मौजूद राशि के बीच अंतर का मुद्दा उठाया है।

पीएम केयर्स निधि को लेकर भी सवाल
सीजेपी की ओर से इससे पहले पीएम केयर्स निधि के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। पार्टी ने पूछा था कि इस निधि की राशि का इस्तेमाल ग्रामीण सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने के लिए क्यों नहीं किया जा सकता। सीजेपी की ओर से पीएम केयर्स निधि के लेखापरीक्षित आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि निधि की कुल राशि वर्ष 2023-24 में करीब 7,173.03 करोड़ रुपये थी, जो 17.8 प्रतिशत बढ़कर वर्ष 2024-25 में करीब 8,452.07 करोड़ रुपये हो गई। हालांकि, पीएम केयर्स निधि की स्थापना का उद्देश्य कोविड-19 महामारी सहित आपातकालीन परिस्थितियों से निपटना और राहत कार्यों में सहायता करना है। निधि की स्थापना 27 मार्च 2020 को की गई थी। प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष हैं, जबकि रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री इसके ट्रस्टी हैं।

भाजपा ने आरोपों को किया खारिज
सीजेपी के आरोपों पर भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा की गोवा इकाई ने पीएम केयर्स निधि को लेकर सीजेपी पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। भाजपा का कहना है कि पीएम केयर्स निधि आपातकालीन परिस्थितियों और आपदा राहत के लिए बनाई गई है और इसे सामान्य सरकारी बजट या स्कूलों के नियमित खर्च के साथ सीधे जोड़ना उचित नहीं है। भाजपा ने सीजेपी को आम आदमी पार्टी का ‘पॉलिटिकल प्रोजेक्ट’ बताते हुए उसके अभियान पर भी सवाल उठाए। पार्टी ने अभिजीत दीपके को पंजाब जाकर वहां के सरकारी स्कूलों की स्थिति देखने की चुनौती दी और आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार द्वारा किए जाने वाले ‘विश्वस्तरीय स्कूलों’ के दावों पर भी सवाल खड़े किए।