Feb 07, 2026

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर उत्तराखंड राज्य में सशक्त भू कानून पर जनता की राय मांगने के लिए, उप जिलाधिकारी देवेंद्र सिंह नेगी द्वारा नरेंद्रनगर तहसील परिसर में, जनप्रतिनिधियों की बैठक आहूत

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*हिमाचल की तर्ज पर,हो उत्तराखंड में सशक्त भू कानून-सरदार पुंडीर* 

नरेंद्रनगर/ टिहरी

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर उत्तराखंड राज्य में सशक्त भू कानून पर जनता की राय मांगने के लिए, उप जिलाधिकारी देवेंद्र सिंह नेगी द्वारा नरेंद्रनगर तहसील परिसर में, जनप्रतिनिधियों की बैठक आहूत की गई।   
   उप जिलाधिकारी द्वारा सशक्त भू कानून लागू किए जाने के संबंध में राय मांगे जाने पर, यूकेडी के केंद्रीय सचिव सरदार सिंह पुंडीर ने 24 साल बाद प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में सशक्त भू कानून लागू किए जाने के मामले में जनता की राय जानने की इस कवायद को, जनता को  दिग्भ्रमित करने वाला बताया। 
  केंद्रीय सचिव सरदार सिंह पुंडीर का कहना था कि वर्ष 2002 में जब से उत्तराखंड प्रदेश का निर्माण हुआ है, तब से लेकर अब तक प्रदेश की जनता सशक्त भू कानून की मांग, आंदोलन के जरिए भी उठाती रही है। 
मगर सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंगी, उल्टा आंदोलनकारियों पर बर्बरता पूर्ण लाठी चार्ज किए गए, मुकदमें दर्ज किए गए।
   पुंडीर ने कहा कि यदि सरकार सशक्त भू कानून प्रदेश में लागू करना चाहती है, तो हिमाचल की तर्ज पर सशक्त भू कानून लागू किया जाए। ताकि प्रदेश की जनता समझे कि सरकार उत्तराखंड की गरीब जनता की हितैषी है। उन्होंने कहा कि पूरा प्रदेश चाहता है कि उत्तराखंड में हिमाचल की तर्ज पर सशक्त भू कानून लागू हो, कहा कि जनता द्वारा एक स्वर में उठाई गई, यह मांग सरकार को ठंडे बस्ते में नहीं डालनी चाहिए। 
  इस अवसर पर नरेंद्रनगर व देवप्रयाग के कांग्रेस जिला अध्यक्ष उत्तम सिंह असवाल ने कांग्रेस की ओर से सशक्त भू कानून के बारे में लिखित ज्ञापन उप जिलाधिकारी देवेंद्र सिंह नेगी को सौंपा,और कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद, प्रदेश में सत्तासीन हुई कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2002 में  माननीय मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में प्रदेश के लिए,सशक्त भू कानून बनाया था।
  कहा कि यदि प्रदेश सरकार उसे तत्काल लागू करे, तो उत्तराखंड की पहाड़ी क्षेत्र की जमीन भू माफियाओं के चुंगल से बचाई जा सकती है। 
  वर्तमान सरकार को चाहिए कि उस सशक्त भू कानून को लागू करे।
  उन्होंने बताया कि कांग्रेस सरकार द्वारा 2002 में बनाए गए भू कानून में स्पष्ट उल्लेख था,कि 500 वर्ग मीटर से ज्यादा की भूमि उत्तराखंड प्रदेश से बाहर का व्यक्ति उत्तराखंड में नहीं खरीद सकता है।
    सरकार से मांग की गई कि सर्वदलीय बैठक बुलाकर सभी पार्टियों के विचार भू कानून पर सरकार सुने एवं सरकार सशक्त भू कानून पर अपना मंतव्य सार्वजनिक करे।
असवाल ने यह भी मांग की, कि भाजपा सरकार द्वारा 2018 में माननीय मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत एवं 2022 में माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में जो काले भू कानून उत्तराखंड प्रदेश में भाजपा सरकार द्वारा लागू किए गए,  उन काले कानूनों को तुरंत ही निरस्त किया जाए। और बिकी हुई भूमि को चिन्हित कर उन्हें सरकार के निहित किया जाए।
 नगर अध्यक्ष ढालवाला मुनि की रेती एडवोकेट अनिल रावत ने कहा कि नोटिफाइड एरिया में भी भू कानून को लागू किया जाए। प्रदेश सचिव दिनेश भट्ट ने कहा कि कृषि भूमि को प्रदेश से बाहरी व्यक्ति को बेचने की अनुमति किसी को न दी जाए। सभासद विनोद सकलानी ने कहा कि स्थानीय उद्योगों में 80% नौकरियां/रोजगार उत्तराखंड के मूल निवासियों को दी जाए।
   इस अवसर पर राजेंद्र सिंह राणा, राजेंद्र सिंह गुसाईं, सभासद विजय धमांदा, दिनेश कुमार, अनुराग पयाल,अनिल बहुखंडी, अजय रमोला, अनिल रावत, दिनेश भट्ट,विनोद सकलानी,जबर सिंह नेगी,जयपाल सिंह नेगी व राजेंद्र सिंह नेगी आदि मौजूद थे।