ऋषिकेश में प्रशासनिक सुधार: किन्नर मांगों को 2100 तक सीमित करना और वेंडर टैक्स विवादों का समाधान

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ऋषिकेश। तीर्थनगरी में शादी-ब्याह और बच्चे के जन्म जैसे खुशी के मौकों पर किन्नरों द्वारा मुंह मांगी रकम वसूलने और हंगामा करने की शिकायतों पर नगर निगम ने बड़ा कड़ा रुख अपनाया है। अब शहर में कोई भी किन्नर बधाई के रूप में 2100 रुपये से अधिक की धनराशि नहीं ले सकेगा। नगर निगम की बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया है।

नगर निगम की बैठक में पार्षद अभिनव सिंह मलिक ने यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा। उन्होंने तर्क दिया कि अक्सर देखा जाता है कि किन्नर खुशियों के मौकों पर भारी-भरकम रकम की मांग करते हैं। मांग पूरी न होने पर कई बार अभद्र व्यवहार, हंगामा और मारपीट की नौबत आ जाती है, जिससे आम जनता को मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती है। इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद अब बधाई की राशि एक समान और सीमित कर दी गई है, जिससे विवादों पर लगाम लगने की उम्मीद है। बैठक की शुरुआत हंगामेदार रही। सदन में सभी 40 पार्षदों के बैठने के लिए पर्याप्त स्थान न होने के कारण कुछ पार्षदों ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया। हालांकि, नगर आयुक्त द्वारा आश्वासन देने और आनन-फानन में फर्नीचर की व्यवस्था करने के बाद मामला शांत हुआ और पार्षद सदन में वापस लौटे। बैठक में सीमा डेंटल क्षेत्र के 44 वेंडरों को 21 हजार रुपये के तहबाजारी शुल्क का नोटिस दिए जाने का मुद्दा भी गरमाया। पार्षद लव कांबोज ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि नगर निगम का कर विभाग अपनी लापरवाही छिपाने के लिए वेंडरों पर एकमुश्त बोझ डाल रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि वेंडर इतनी बड़ी राशि देने में सक्षम नहीं हैं। बधाई राशि तय करने के अलावा पार्षदों ने शहर की बुनियादी समस्याओं को भी जोर-शोर से उठाया। आवारा पशुओं को तत्काल गौशालाओं में शिफ्ट करने की मांग की गई। खराब पड़ी लाइटों को दुरुस्त करने और सड़कों की मरम्मत का मुद्दा उठा। आवारा कुत्तों से होने वाली परेशानी के समाधान की अपील की गई। इसके साथ ही पार्षदों को दिए जाने वाले भत्ते पर भी सहमति बनी है, जिसकी फाइल अनुमति के लिए शासन को भेजी जाएगी। नगर निगम के इस फैसले की शहर में काफी चर्चा है, विशेषकर बधाई राशि सीमित करने के निर्णय को आम जनता ने राहतकारी बताया है।